🏆 राजस्थान की वेशभूषा 🏆 औरतों के पहनावे (राजस्थानी वेशभूषा ) 👉 आदिवासी महिलाओं (विवाहित महिला) की ओढ़नी - 1. तारा भांत की ओढ़नी 2. केरी भांत की ओढ़नी 3. लहर भांत की ओढ़नी 4. ज्वार भांत की ओढ़नी 👉 कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी- ➯आदिवासी अविवाहित महिला (कुंवारी कन्या) के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी कहते है। 👉 जाम साई- ➯आदिवासी महिलाओं की साड़ी को जाम साई कहते है। 👉 नादंणा - ➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे को नादणा कहते है। ➯नादणा घाघरा राजस्थान में भिलवाड़ा का प्रसिद्ध है। 👉 रेनसाई - ➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे की छिट को रेनसाई कहते है। 👉 सिंदरी - ➯भील स्त्रियों के लाल रंग की साड़ी को सिंदरी कहते है। 👉 पिरिया - ➯भील स्त्रियों के द्वारा पहने जाने वाले पीले रंग के लहंगे को पिरिया कहते है। 👉 तिलका- ➯तिलका मुस्लिम महिलाओं का पहनावा है। 👉 कछाबू - ➯भील स्त्रियों के द्वारा घुटने तक पहने जाने वाले लहंगे को कछाबू कहते है। 👉 कवर जोड़ - ➯मामा के द्वारा वधु के लिये लाई गई ओढ़नी को कवर जोड़ कहते है। 👉 बाला चुनड़ी - ➯मामा के द्वारा वधु की माँ के लिये लाई गई चुनड़ी/...
पद परिचय (Pad prichay) की परिभाषा वाक्य में शब्दों के प्रयुक्त होने पर शब्द पद कहलाते हैं। वाक्य में शब्द नहीं, पद होते हैं। वाक्य में प्रत्येक पद के स्वरूप तथा अन्य पदों के साथ उसका संबंध बताने की क्रिया को पद-परिचय कहते हैं। पद परिचय का अर्थ है वाक्य में प्रयुक्त पदों का व्याकरणिक परिचय देना। 'पदनिर्देश', 'पदच्छेद', 'पदविन्यास', पदपरिचय के ही पर्यायवाची शब्द हैं। पदपरिचय में वाक्य के पदों का परिचय, उनका स्वरूप एवं दूसरे पदों के साथ उनके संबंध को दर्शाना होता है, अर्थात व्याकरण संबंधी ज्ञान की परीक्षा और उस विद्या के सिद्धांतों का व्यावहारिक उपयोग ही पदपरिचय का मुख्य उद्देश्य है। पद परिचय के भेद प्रयोग के आधार पर पद परिचय आठ प्रकार के होते हैं- (1) संज्ञा (2) सर्वनाम (3) विशेषण (4) अव्यय (5) क्रियाविशेषण (6) क्रिया (7) संबंधबोधक (8) समुच्चयबोधक (1) संज्ञा का पदपरिचय :- वाक्य में संज्ञापदों का पदपरिचय करते समय संज्ञा, संज्ञा के भेद, लिंग, वचन, कारक तथा क्रिया या अन्य पदों के साथ उसका संबंध बतलाना आवश्यक है। उदाहरण1- हिमालय भारत का पहाड़ है। उपर्युक्त वाक्य में ...
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